संदेश

हे पथिक करना विरोध तू,

 हे पथिक करना विरोध तू,  भ्रष्टाचार की इन गलियों का,  चाहे शीतल मंद बयार बहे, चाहे सुर सरिता की धार बहे।  चाहे धन संचय की पुकार कहे,  चाहे वैभव की ललकार कहे,  तू पथ भ्रमित मत हो जाना।  तू वित्त गृहीत मत कहलाना।  हे पथिक करना विरोध तू भ्रस्टाचार की इन गलियों का। चाहे मीठे रस की लार मिले,  चाहे माया रुपी संसार मिले ,  चाहे कृतिम पुष्प हजार खिले,  चाहे द्रव्य, कीमती पदार्थ मिले,  तू तार तार मत कर जाना।  तू विष कटक मत बो जाना।  हे पथिक करना विरोध तू,  भ्रष्टाचार की इन गलियों का। सागर का मंथन कर फिर से,  अमृत का फिर प्रपात बहा  शिव रूपी वो कंठ बनाकर,  तू विष का जमघट पीते जाना। हे पथिक करना विरोध तू,  भ्रष्टाचार की इन गलियों क। राष्ट्र समर्पित कर, सब अभिलाषाएं,  अब कलम उठा, उठा ध्वजा तू,  राण में कूद चल तलवार उठा,  कर अस्त-व्यस्त इन आक्रांताओं को ।  भारत भूमि को अब बना स्वर्ग तू,  हे पथिक करना विरोध तू  भ्रष्टाचार की इन गलियों का। #भ्रष्टाचार #sarkar #gov #kavita #poem ...

संवाद कर ले

  चलो कुछ संवाद कर ले,  वक्त वे वक्त एक दूजे को याद कर ले ।    न करे किसी से बात न सही,  चलो खुद से तो कम से कम बात कर ले ।    चलो कुछ जाम भर ले ।  मैरवाने पर चले, खुद को बदनाम कर ले।  न भरे जाम पे जाम न सही चलो आँखो से तो एक दूसरे का नाम भर ले ।   चलो कुछ काम कर ले |   आस्था से अनास्था से ईश्वर का सत्कार कर ले।  न जपे  ईश्वर का जाप न सही,    चलो  किसी जरूरतमन्द की जरूरत का इंतजाम कर ले चलो कुछ संवाद कर ले, अपनो से अपनो को बेहिसाब कर ले, तोड़ दे बेड़ियां, अहंकार, मद और घमंड की। दिलों में प्यार की फुहार बाहर ले , न करे प्यार ना सही  चलो नफरतों को  चलो कुछ संवाद कर ले। ।      #Ishwar  #samvad 

कैसा कर्ज

  स्वप्न धूमिल से पड़ गए , मन खुले आसमान में कौँधती बीजली सा विचलित है । ऐसा विचित्र अकेलापन पहले कभी न था , सब तो है मेरे पास रुपया पैसा रिश्ते - नाते दोस्त - शत्रु तमाम दुनियादारी फिर भी घण्टो खुद में खुद के सवालो से जुझता रहता हूँ । डरा सा सहमा सा रहने लगा हूँ , किसका डर मालूम नहीं ? कैसा डर समझ नहीं आता , ऐसा लगता है जैसे मेरे मेरे कानो के पास से  उफान मारती भयानक अवाज वाली रेलगाडी गुजर गई हो और मैं कुछ एक पल के लिए स्तब्ब सा हो गया हूँ कुछ देखने सुनने का जी नहीं करता पढ़ने की तो बात ही क्या बताऊ कोई नयी या पुरानी किताब भी अनजानी सी लगती है । जैसे उसकी भाषा - शैली मैंने कभी पहले अनुभव ही ना की हो । पढने अगर बैठा भी तो उसके शब्द तो मन में तैरते है पर मन की सुनामी में ज्यादा देर टिक नहीं पाते और अनसुलझे - अनकहे विचारों से थक हार कर मानो बैठ से जाते है। इतनी कम उम्र में इतना बोझ लगता है , मुझे कर्ज से लदे किसान की भाति ले डूबेगा। मैं महाजन के कर्ज से निकल नहीं पाऊगा उसका ब्याज रूपी नाग मुझे इस कर मेरी सारी कौधती - धधकती  कल्पनाओं को शात कर देगा। अच्छा भी रहेगा मैं भी तो इस...

Satark Bharat Samradh Bharat

                                                  सतर्क भारत समृद्ध भारत भारतीयो के अथक प्रयास तथा महान त्याग , बलिदान से मिली आज़ादी ने हम सभी एक नया भारत प्रदान किया जिसमे हम सभी को जीवन मैं नए नए मार्ग भी दिये जिन रास्तो पर हम चलकर अपना , अपने समाज का तथा अपने भारत देश का विकास करे और उसकी प्रगति के नए नए आयाम दिन प्रति दिन बनाते रहे ताकि हमारा देश भी इस पिछड़ी ओर दरिद्र स्थिति से निकल कर विश्व के सभी देशो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सके पर ये सब इतना सरल ओर आसान नही था जिसके लिए हमे एके नया अध्याय अपने संविधान के रूप मैं लिखने की जरूरत महसूस हुई जिसको हमारे देश के महान बुद्धिजीवों ओर नयी सोच के लोगो ने पूरा किया | जिस पर चल कर हमने एके नए भारत की शुरूवात की ओर विश्व मैं एक नया कीर्तिमान स्थापित किया, पर इनसब उपलब्धियों के हमारे बीच समाज मे भ्रष्टाचार (कर्पसन ) , घूसखोरी, चोरी रिश्वतख़ोरी,तथा जमाखोरी को व्याप्त कर दिया जिससे देश मैं एक भयानक स्थिति पैदा हो गयी...

सुरक्षा

                                                                सुरक्षा  सुरक्षा स्वयं की हो या अपने सगे संबंधियों की, घर की, कार्यस्थल की, जान माल की,सुरक्षा हमेशा से हमारे लिए एक कठिन कार्य रहा हैं। आदि काल से अब तक हमने अपनी सुरक्षा को किसी भी अन्य कार्य से बढ़कर प्राथमिकता दी हैं, क्योकि एक कहावत हैं जान हैं तो जहान हैं | सुरक्षा जीवन जीने की एक कसौटी हैं जिसपर चलकर ही हम एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की कल्पना कर सकते हैं। सुरक्षित वातावरण हमारे समाज के लिए एक अविरल धारा का काम करता हैं। यह धारा हमारे समाज को सशक्त और मजबूत बनाने की ओर हमेशा तत्पर रहती हैं। सुरक्षा को हमे सिर्फ स्वयं तक सीमित न रखकर एक व्यापक स्तर पर लोगो की प्राथमिकता से जोड़ने की ओर उन्मुख होना चाहिए। सुरक्षा से हमारा आशय यह हैं की सुरक्षा किसी व्यक्ति या वस्तु विशेष से कही ऊपर हैं। सुरक्षा देश की भी हो सकती हैं, किसी क्षेत्र विशेष की, किसी सार्वजनिक स्थ...